फर्जी डिग्री रैकेट का भंडाफोड़, शिक्षक निकला मास्टरमाइंड
कानपुर| में रुपये लेकर मार्कशीट दिलाने के मामले में किदवईनगर पुलिस के हत्थे चढ़ा शैलेंद्र कुमार मूलरूप से रायबरेली के ऊंचाहार का रहने वाला है। वह गणित से परास्नातक है और लंबे समय तक निजी कॉलेज में गणित का शिक्षक रहा। बाद में विश्वविद्यालयों के बाबूओं से नजदीकी बढ़ने पर बिना पढ़ाई के पास की मार्कशीट दिलाने का ठेकेदार बन जूही गौशाला में शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन नामक से कार्यालय चलाने लगा। वह मार्कशीट दिलाने का ठेका लेते वक्त गारंटी लेता था कि कहीं भी चेक होने पर मार्कशीट ऑनलाइन दिखेगी। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि साकेतनगर स्थित कविशा अपार्टमेंट में रहने वाले शैलेंद्र ने ऐसा गिरोह बनाया है, जो विश्वविद्यालयों के लालची बाबूओं को ढूंढकर गिरोह से मिलाता। तय रकम पर उनसे मनचाही मार्कशीट या डिग्री बनवाकर ऑनलाइन करा देते।
किसी बाबू के संपर्क में था दिलीप
ऐसा होने पर कहीं भी जांच होने पर मार्कशीट या डिग्री पकड़े जाने की गुंजाइश नहीं रहती थी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कौशांबी के नागेंद्र मणि त्रिपाठी कंप्यूटर में परास्नातक है। गाजियाबाद के विजय विहार फेज-वन का जोगेंद्र 10वीं पास है। चौथा आरोपी शुक्लागंज के इंदिरानगर अश्वनी कुमार सिंह 12वीं पास है। पुलिस की जांच में सामने आया कि रनियां निवासी दिलीप छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के किसी बाबू के संपर्क में था।
विश्वविद्यालय से मिलती थी फेल छात्रों की जानकारी
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इन विश्वविद्यालयों के बाबू ही आरोपियों को फेल हुए छात्रों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराते थे। फेल होने वाले छात्रों का डाटा मिलने के बाद गिरोह के लोग उनसे संपर्क कर उन्हें पास होने की गारंटी दिलाते थे। जैसे-जैसे बातचीत का दौर आगे बढ़ता आरोपी उन्हें बिना परीक्षा दिए मार्कशीट और डिग्री दिलाने का भरोसा दे देते। आरोपी उनसे कुछ दिनों में मार्कशीट बनवाने का समय और 75 फीसदी रकम ले लेते थे। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कई वर्षों से लोगों को डिग्री बेचने का धंधा कर रहे थे।
हाईस्कूल से लेकर बीटेक-एलएलबी की डिग्री बेच रहे थे शातिर
किदवईनगर पुलिस ने जब शैलेंद्र के जूही गौशाला स्थित कार्यालय में छापा मारा तो वहां काफी संख्या में माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटर की मार्कशीट व प्रमाण पत्र, व कई विश्वविद्यालयों की डिग्रियां, मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद हुए। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि आरोपियों के पास से हाईस्कूल से लेकर बीटेक और एलएलबी तक की डिग्री बरामद हुई है। वहीं, शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की डिप्टी रजिस्ट्रार की नकली मुहर बरामद की । आरोपियों ने लगभग 80 फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट जारी करने की बात भी कबूल की है।
इन विश्वविद्यालयों की इतनी डिग्री मिलीं
छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी, कानपुर– 357
श्रीकृष्ण विश्वविद्यालय, छतरपुर– 102
मंगलायतन यूनिवर्सिटी, नोएडा– 40
जेएस विश्वविद्यालय, फिरोजाबाद– 11
एशियन विश्वविद्यालय, मणिपुर– 280
ग्लोकल विश्वविद्यालय, सहारनपुर– 02
लिंग्या विश्वविद्यालय, फरीदाबाद– 100
सिक्किम प्रोफेशनल विश्वविद्यालय, सिक्किम– 03
प्रज्ञान इंटरनेशनल विश्वविद्यालय, झारखंड– 23
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ– 10
हिमालयन गढ़वाल, विश्वविद्यालय, उत्तराखंड– 01
हिमालयन विश्वविद्यालय, ईंटानगर-01
इन आरोपियों की पुलिस को है तलाश
पुलिस को अभी गिरोह के पांच सदस्यों की तलाश है। इनमें छतरपुर निवासी मयंक भारद्वाज, हैदराबाद के मनीष उर्फ रवि, गाजियाबाद का विनीत, भोपाल का शेखू व कानपुर का शुभम दुबे शामिल हैं।

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