परिसीमन के बाद छत्तीसगढ़ का राजनीतिक नक्शा पूरी तरह बदलने की संभावना
रायपुर|आज संसद में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 को सदन में पेश किया. अगर इस विधेयक को मंजूरी मिलती है, तो भारत में लगभग 50 साल बाद लोकसभा और राज्य विधानसभा सीटों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं छत्तीसगढ़ में भी विधानसभा और लोकसभा की सीटें भी बढ़ जाएगी|
2002 से छत्तीसगढ़ में सीटों की संख्या 90
छत्तीसगढ़ में 1977 के बाद से न तो लोकसभा और न ही राज्य विधानसभा की सीटों में कोई वृद्धि हुई है. अब तक चार बार परिसीमन आयोग का गठन किया गया है, और इन आयोगों की रिपोर्ट के आधार पर तीन बार लोकसभा और राज्य विधानसभा सीटों में बदलाव किया गया है. छत्तीसगढ़ में भी 1952, 1962 और 1972 में परिसीमन आयोगों द्वारा सीटों में बदलाव किया गया. लेकिन 2002 में गठित परिसीमन आयोग ने सिर्फ विधानसभा क्षेत्रों के नाम और क्षेत्र में बदलाव किया था, सीटों की संख्या 90 ही रही थी|
छत्तीसगढ़ में बढ़ेंगी विधानसभा और लोकसभा की सीटें
बिल पास होने के बाद अगला परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा. इसके तहत छत्तीसगढ़ में लोकसभा की 4 सीटें और राज्य विधानसभा की 35 से 40 सीटें बढ़ सकती है. यदि यह बदलाव लागू होता है, तो छत्तीसगढ़ में लोकसभा की सीटें 17 और विधानसभा की सीटें 135 हो जाएंगी|
छत्तीसगढ़ के कब-कब हुआ बदलाव?
- छत्तीसगढ़ में साल 1952 से अब तक विधानसभा सीटों की संख्या में 4 बार बदलाव हुआ है.
- 1952 में विधानसभा सीटों की संख्या 82 थी, लेकिन 1957 में यह घटकर 81 हो गई.
- इसके बाद 1962 में परिसीमन आयोग ने विधानसभा सीटों को बढ़ाकर 84 कर दिया और 1972 में यह संख्या बढ़कर 90 हो गई.
- तब से लेकर अब तक विधानसभा की सीटें 90 ही रही हैं.

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