जबलपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष की ताजपोशी को लेकर छिड़ा सियासी घमासान अब अंतिम पड़ाव पर है। भाजपा संगठन ने इस बार सत्ता के विकेंद्रीकरण और शक्ति संतुलन के सिद्धांत पर चलते हुए अपनी रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, संगठन अब उन भौगोलिक क्षेत्रों में नेतृत्व विकसित करने पर जोर दे रहा है, जहां उसे चुनावी मोर्चे पर कड़ी चुनौती मिलती है। इस बदली हुई कार्ययोजना के केंद्र में पूर्व विधानसभा क्षेत्र सबसे ऊपर है, जिसे लंबे समय से विपक्ष का गढ़ माना जाता रहा है।

​मजबूत किलों के बजाय संघर्ष पर फोकस

​शहर के राजनीतिक परिदृश्य का विश्लेषण करें तो कैंट, उत्तर और पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा की संगठनात्मक स्थिति अत्यंत सुदृढ़ है। इन क्षेत्रों में पार्टी के पास पहले से ही स्थापित जनप्रतिनिधि और अनुभवी नेताओं की बड़ी फौज मौजूद है। रणनीतिकारों का मानना है कि सुरक्षित सीटों के बजाय उन क्षेत्रों में पद देना अधिक फायदेमंद होगा, जहां संगठन को और अधिक विस्तार की आवश्यकता है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में जिम्मेदारी देने से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है और विपक्षी घेराबंदी को भेदने में आसानी होती है।

​क्षेत्रीय संतुलन का नया फॉर्मूला

​कैंट, उत्तर और पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख नेताओं ने इस बार नगर अध्यक्ष की दौड़ में अपने समर्थकों को आगे बढ़ाने के बजाय एक मौन सहमति का रुख अपनाया है। इस चुप्पी के पीछे मुख्य कारण आपसी समन्वय को बनाए रखना और कार्यकर्ताओं के बीच संभावित असंतोष को रोकना है। इन क्षेत्रों के वरिष्ठ नेतृत्व को यह अंदेशा है कि किसी एक नाम को प्राथमिकता देने से अन्य सक्रिय दावेदारों में नाराजगी हो सकती है। स्थानीय नेताओं की इसी दूरदर्शिता और प्रदेश संगठन की भावी योजना ने चयन प्रक्रिया का रुख पूर्व विधानसभा क्षेत्र की ओर मोड़ दिया है।

​कांग्रेस के प्रभाव को कम करने की जुगत

​पूर्व विधानसभा क्षेत्र वर्तमान में भाजपा के लिए सबसे जटिल चुनौती बना हुआ है। यहां कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक लखन घनघोरिया का वर्चस्व है और साथ ही युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया की सक्रियता भी इसी क्षेत्र में सबसे अधिक रहती है। भाजपा इस दोहरी चुनौती को काटने के लिए युवा मोर्चा को एक ढाल और तलवार के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है। पार्टी नेतृत्व का आंकलन है कि यदि नगर अध्यक्ष इसी क्षेत्र से चुना जाता है, तो कांग्रेस के प्रभाव वाले वार्डों में भाजपा की उपस्थिति अधिक आक्रामक और संगठित हो सकेगी।

​पिछड़ा वर्ग पर साधने की रणनीति

​पूर्व विधानसभा क्षेत्र की आबादी में अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की संख्या निर्णायक है। आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर भाजपा इन वर्गों के युवाओं को पार्टी की मुख्य विचारधारा से जोड़ने के लिए गंभीर है। संगठन की खोज एक ऐसे प्रभावशाली चेहरे पर जाकर टिक रही है जो स्थानीय स्तर पर जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सके और विपक्षी खेमे की हर चाल का जमीनी स्तर पर जवाब दे सके। कैंट और अन्य क्षेत्रों से कई नामों पर विचार होने के बावजूद रणनीतिक प्राथमिकता में पूर्व क्षेत्र के दावेदार सबसे मजबूत नजर आ रहे हैं।

​नगरीय निकाय चुनाव के लिए नई फौज

​भारतीय जनता पार्टी का अंतिम लक्ष्य आगामी नगर निगम चुनावों में अपनी स्थिति को अभेद्य बनाना है। युवा मोर्चा का अध्यक्ष केवल एक पद नहीं, बल्कि वह बूथ स्तर पर काम करने वाली कार्यकर्ताओं की टीम का मुख्य सूत्रधार होता है। पूर्व विधानसभा क्षेत्र में युवा नेतृत्व विकसित होने से नगर निगम चुनाव में भाजपा के पार्षद पद के उम्मीदवारों को सीधा संगठनात्मक लाभ मिलने की उम्मीद है। फिलहाल नामों के चयन की प्रक्रिया आंतरिक रूप से पूरी की जा चुकी है और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए आधिकारिक घोषणा की औपचारिकता शेष है।